भारत चार साल के अंतराल के बाद गेहूं का निर्यात फिर से शुरू कर रहा है, जिसमें कांडला बंदरगाह से 22,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजा जाएगा। यह कदम मजबूत घरेलू स्टॉक और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण उठाया गया है।
नई दिल्ली| 4 साल के अंतराल के बाद भारत एक बार फिर गेहूं के निर्यात को अनुमति दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2022 के बाद पहली बार गेहूं के एक्सपोर्ट को मंजूरी मिली है क्योंकि घरेलू स्टॉक मजबूत हुआ है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और बेहतर ट्रांसपोर्टिंग दरों ने भारतीय गेहूं को एशिया और मध्य-पूर्व के खरीदारों के लिए प्रतिस्पर्धी बना दिया है। 22,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजने की तैयारी व्यापारिक सोर्स के मुताबिक देश की प्रमुख कंपनी ITC ने पश्चिमी तट स्थित कांडला बंदरगाह से करीब 22,000 मीट्रिक टन गेहूं की लोडिंग भी शुरू कर दी है। ये गेहूं संयुक्त अरब अमीरात भेजने की तैयारी की जा रही है। शिपिंग में सुधार और इंटरनेशनल मार्केट में अच्छी कीमतों के चलते एक्सपोर्ट शुरू हो रहा है। 2022 में रोका गया था निर्यात पिछले कुछ सालों में मौसम की उथल-पुथल और भीषण गर्मी के कारण गेहूं का उत्पादन प्रभावित हुआ था। ऐसा लगा था कि साल 2017 के बाद भारत को गेहूं इंपोर्ट करना पड़ सकता है। घरेलू स्टॉक को मजबूत रखने और फूड सिक्योरिटी के चलते भारत सरकार ने 2022 में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसके बाद साल 2023-24 में भी रोक जारी रखी गई थी। अब स्थिति सामान्य होने पर रोक हटा दिया गया है। अच्छी पैदावार से मिली निर्यात को मंजूरी बता दें कि भारत चीन के बाद गेहूं उत्पादन के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इस साल गेहूं की अच्छी पैदावार होने के कारण ना सिर्फ भंडारण मजबूत हुआ है बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, और भारत अपनी मौजूदगी भी दर्ज करा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत गेहूं एक्सपोर्ट के बड़े प्लेयर्स में फिर शामिल हो सकता है। ये भी पढ़ें: Rice Export: चीन ने फिर दिया भारत को झटका, GMO का बहाना बना कर लौटाई चावल की खेप ईरान-अमेरिका युद्ध का भी असर बता दें कि मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के चलते माल ढुलाई की लागत बढ़ी है। कुछ खरीददार हैं जिन्हें तत्काल शिपमेंट की जरूरत है और उन्होंने भारत से बातचीत आगे बढ़ाई। रिपोर्ट्स के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात को 22,000 टन गेहूं निर्यात करने का सौदा लगभग 275 डॉलर प्रति टन के भाव पर हुआ है।.
नई दिल्ली| 4 साल के अंतराल के बाद भारत एक बार फिर गेहूं के निर्यात को अनुमति दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2022 के बाद पहली बार गेहूं के एक्सपोर्ट को मंजूरी मिली है क्योंकि घरेलू स्टॉक मजबूत हुआ है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और बेहतर ट्रांसपोर्टिंग दरों ने भारतीय गेहूं को एशिया और मध्य-पूर्व के खरीदारों के लिए प्रतिस्पर्धी बना दिया है। 22,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजने की तैयारी व्यापारिक सोर्स के मुताबिक देश की प्रमुख कंपनी ITC ने पश्चिमी तट स्थित कांडला बंदरगाह से करीब 22,000 मीट्रिक टन गेहूं की लोडिंग भी शुरू कर दी है। ये गेहूं संयुक्त अरब अमीरात भेजने की तैयारी की जा रही है। शिपिंग में सुधार और इंटरनेशनल मार्केट में अच्छी कीमतों के चलते एक्सपोर्ट शुरू हो रहा है। 2022 में रोका गया था निर्यात पिछले कुछ सालों में मौसम की उथल-पुथल और भीषण गर्मी के कारण गेहूं का उत्पादन प्रभावित हुआ था। ऐसा लगा था कि साल 2017 के बाद भारत को गेहूं इंपोर्ट करना पड़ सकता है। घरेलू स्टॉक को मजबूत रखने और फूड सिक्योरिटी के चलते भारत सरकार ने 2022 में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसके बाद साल 2023-24 में भी रोक जारी रखी गई थी। अब स्थिति सामान्य होने पर रोक हटा दिया गया है। अच्छी पैदावार से मिली निर्यात को मंजूरी बता दें कि भारत चीन के बाद गेहूं उत्पादन के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इस साल गेहूं की अच्छी पैदावार होने के कारण ना सिर्फ भंडारण मजबूत हुआ है बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, और भारत अपनी मौजूदगी भी दर्ज करा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत गेहूं एक्सपोर्ट के बड़े प्लेयर्स में फिर शामिल हो सकता है। ये भी पढ़ें: Rice Export: चीन ने फिर दिया भारत को झटका, GMO का बहाना बना कर लौटाई चावल की खेप ईरान-अमेरिका युद्ध का भी असर बता दें कि मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के चलते माल ढुलाई की लागत बढ़ी है। कुछ खरीददार हैं जिन्हें तत्काल शिपमेंट की जरूरत है और उन्होंने भारत से बातचीत आगे बढ़ाई। रिपोर्ट्स के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात को 22,000 टन गेहूं निर्यात करने का सौदा लगभग 275 डॉलर प्रति टन के भाव पर हुआ है।
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