ITBP jawans mother pain after drip Railbazar police statement. Follow Dainik Bhaskar Latest Updates.
कानपुर में ITBP जवान की मां बोलीं- समय पर सुनवाई होती तो हाथ कटने से बच जाता“13 मई को मैं कृष्णा हॉस्पिटल के ICU में भर्ती थी। डिप से दवा चढ़ाई जा रही थी। इसी दौरान मेरे हाथ में तेज दर्द शुरू हो गया। मैं दर्द से चिल्लाने लगी, तब एक स्टाफ आया। उसने हाथ को कसकर बांधा और सफेद टेप लगा दिया। कहा कि थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा, फिर वहां से चला गया।” ये बातें ITBP जवान की मां निर्मला देवी ने पुलिस को दिए बयान में कहीं। उन्होंने बताया- इसके बाद दर्द कम होने के बजाय लगातार बढ़ता गया। वह पूरी रात दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। अगले दिन जब मेरा बेटा विकास अस्पताल पहुंचा तो मेरा हाथ काला पड़ चुका था। हालत बिगड़ती देख वह मुझे तुरंत पारस हॉस्पिटल लेकर गया। वहां डॉक्टरों ने हाथ काटने की बात कही। अगर समय रहते इलाज मिल जाता और मेरी बात सुनी जाती, तो शायद मेरा हाथ बच सकता था। दरअसल, ITBP कैंप में तैनात कमांडो विकास सिंह की मां निर्मला देवी के पेट की समस्या का इलाज टाटमिल चौराहे स्थित कृष्णा सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में हुआ था। आरोप है कि इलाज के दौरान लापरवाही से उनके हाथ में संक्रमण फैल गया, जिसे बाद काटना पड़ा। घटना से नाराज विकास मंगलवार, 19 मई को मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचे थे। उनसे कृष्णा अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस कमिश्नर ने जांच के लिए मामला CMO को भेज दिया था। CMO की ओर से बनाई गई जांच कमेटी ने रिपोर्ट दी, लेकिन उसमें न साफ वजह निकली और न कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज 24 मई को ITBP के 50 जवान अपने अफसरों के साथ पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचे। यहां कार्रवाई की मांग की। स्थिति को देखते हुए CMO ने दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट में दोनों हॉस्पिटल की लापरवाही सामने आई है। इसके बाद पुलिस ने दोनों हॉस्पिटल पर केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी। इस मामल में कल यानी बुधवार को पुलिस पारस हॉस्पिटल में भर्ती निर्मला देवी की बयान दर्ज करने पहुंची थी। ITBP जवान की मां निर्मला देवी ने बताया- अगर समय रहते मेरी बात सुनी जाती, तो मेरा हाथ कटने से बच सकता था।निर्मला देवी ने पुलिस को बताया- मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, जिसके बाद मेरे बेटे विकास ने मुझे कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टर ने चेकअप किया और फिर मुझे ICU में शिफ्ट कर दिया गया। स्टाफ ने मेरे हाथ में वीगो लगाया और दवाई चढ़ाई जाने लगी। कुछ देर बाद मेरे हाथ में तेज दर्द शुरू हो गया। दर्द बढ़ने पर मैं रोने और चिल्लाने लगी। तभी एक स्टाफ आया। उसने मेरा हाथ खींचकर उस पर सफेद टेप कसकर लगा दिया और कहा कि अब दर्द नहीं होगा, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा। इसके बाद वह वहां से चला गया। इसके बाद भी दर्द कम नहीं हुआ, बल्कि धीरे-धीरे और बढ़ता गया। मैं पूरी रात दर्द से तड़पती और चिल्लाती रही, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। कोई देखने तक नहीं आया। सुबह तक मेरा हाथ काला पड़ चुका था।निर्मला देवी के मुताबिक, अगले दिन सुबह जब मेरा बेटा विकास आया तो उसने पूछा क्या हुआ। मैंने उसे बताया कि हाथ में बहुत तेज दर्द हो रहा है। इसके बाद उसने वीगो हटवाया। शाम तक आराम नहीं मिलने पर वह मुझे पारस हॉस्पिटल लेकर गया। वहां डॉक्टरों ने मेरा हाथ काट दिया। अगर समय रहते मेरे दर्द को गंभीरता से लिया जाता और वीगो निकाल दिया जाता, तो शायद मेरा हाथ कटने से बच जाता।शनिवार को ITBP के हथियारबंद जवानों ने पुलिस कमिश्नरेट को घेर लिया था।करीब एक घंटे तक कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में माहौल तनावपूर्ण रहा। कार्रवाई के आश्वासन के बाद जवान वापस लौट गए।विकास सिंह मूलरूप से फतेहपुर में खागा हथगाम के रहने वाले हैं। इस समय उनकी पोस्टिंग महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में है। यहां आईटीबीपी का कमांड ऑफिस है। विकास ने बताया कि उनकी 56 साल की मां निर्मला देवी को सांस की दिक्कत थी। उन्हें कब्ज और कमजोरी की शिकायत थी। मां को आईटीबीपी महाराजपुर स्थित अस्पताल में दिखाया था। 13 मई, 2026 को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने आईटीबीपी के पैनल में शामिल अस्पताल यानी हायर सेंटर रेफर किया था। वह मां को एम्बुलेंस से लेकर निकले। रास्ते में भीषण जाम लगा था और उनकी मां की हालत लगातार नाजुक हो रही थी। इस कारण, विकास उन्हें आनन-फानन में टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल ले गए। वहां डॉक्टरों ने मां को तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट पर लिया और उनके हाथ में कैनुला लगाया। विकास का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने मां को गलत इंजेक्शन लगा दिया। इससे उनका हाथ काला पड़ गया। सूजन लगातार बढ़ती चली जा रही थी। मां की हालत बिगड़ने लगी तो 14 मई की शाम उन्हें बिठूर रोड बैकुंठपुर स्थित पारस हॉस्पिटल में एडमिट कराया। 17 मई को डॉक्टरों ने बहुत प्रयास किया, लेकिन इस स्टेज पर उन्हें रेफर किया गया था कि मां के हाथ में संक्रमण फैल चुका था। इस वजह से डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ गया।3 दिन तक कार्रवाई के लिए भटकते रहे कांस्टेबल विकास मां का हाथ कटने के बाद ITBP कांस्टेबल विकास सिंह बेहद आहत हो गए। वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर तीन दिनों तक चौकी, थाना और पुलिस कमिश्नर कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। विकास अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे, लेकिन शुरुआत में उनकी सुनवाई नहीं हुई। बाद में पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने मामले का संज्ञान लिया। कटा हुआ हाथ देखने के बाद उन्होंने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया और सीएमओ को जांच के निर्देश दिए। हालांकि शुरुआती जांच रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद दोबारा मेडिकल कमेटी गठित करनी पड़ी।23 मई को ITBP के 40 से 50 जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। मामले के तूल पकड़ने के बाद सीएमओ और वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा जांच के निर्देश दिए गए। 25 मई को आई नई जांच रिपोर्ट में दोनों अस्पतालों को लापरवाही का दोषी पाया गया।सीएमओ द्वारा गठित नई जांच टीम में एसीएमओ रमित रस्तोगी समेत चार डॉक्टर, ITBP प्रतिनिधि, एमबीबीएस डॉक्टर डॉ.
विपिन ताडा और प्रशिक्षु आईपीएस सुमेध मिलिंद जाधव शामिल थे। टीम ने दोनों अस्पतालों का निरीक्षण किया और डॉक्टरों के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया कि मरीज को हृदय संबंधी समस्या भी थी। इलाज के दौरान नसों में थक्के बनने से हाथ तक रक्त संचार प्रभावित हो गया, जिससे संक्रमण बढ़ता गया। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह नहीं ली गई, जिसके चलते स्थिति लगातार गंभीर होती चली गई और आखिरकार हाथ काटना पड़ा। जांच में कांस्टेबल विकास सिंह के आरोप सही पाए गए।पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने ITBP कमांडेंट और जवानों के व्यवहार पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में जवानों का पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचना और फॉर्मेशन बनाकर खड़े होना अनुशासनहीनता को दर्शाता है और इससे गलत संदेश गया। कमिश्नर ने ITBP के महानिदेशक को पत्र लिखकर संबंधित जवानों और उनके व्यवहार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि जवान कार्यालय परिसर में फॉर्मेशन बनाकर खड़े हैं, उन्होंने तत्काल आपत्ति जताई। इसके बाद जवानों को वहां से हटाया गया और घटना पर खेद भी व्यक्त किया गया। निर्मला देवी के भाई राजकुमार के मुताबिक, पुलिस ने उनकी बहन का एक पेज का बयान दर्ज किया है। बयान की कई प्रतियां तैयार कर उस पर निर्मला देवी के अंगूठे के निशान लिए गए हैं। इसके साथ ही पुलिस ने बयान का वीडियो भी रिकॉर्ड किया है। पुलिस अब इस बयान को अपनी विवेचना में शामिल करेगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।सबसे सीनियर IPS के पास 2 साल से काम नहीं:DGP समेत कई के पास एक्स्ट्रा चार्ज; यूपी पुलिस में अफसरों की कमी या भरोसे की?
यूपी के पुलिस विभाग में बड़ी जिम्मेदारियां कुछ अफसरों तक सीमित हैं। सीनियर होने के बाद भी कई अधिकारियों को काम नहीं दिया गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 1990 बैच की IPS रेणुका मिश्रा हैं, जो पिछले 2 साल से बिना किसी जिम्मेदारी के हैं। 7 साल से सस्पेंड चल रहे जसवीर सिंह भी इसी लिस्ट में शामिल हैं।मुंह फुलाकर घर बैठीं विधायक पूजा पाल, पिस्टल ठांसकर दरोगा ने दौड़ाई बुलेटकानपुर में ITBP जवानों ने पुलिस कमिश्नरेट घेरा:गोरखपुर में ड्राइवर-क्लीनर जिंदा जले, सिर्फ कंकाल बचा:बिहार के 6 जिलों में भारी बारिश की चेतावनीपेड़ों से गिरकर रोज मर रहे 250 से अधिक चमगादड़प्रयागराज में देर रात से बदला मौसम, तापमान में गिरावटआज आंधी-बारिश का अलर्ट, पारा 48 डिग्री के ऊपरहीट स्ट्रोक मरीजों के लिए हर अस्पताल में कोल्ड रूम
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