भारत की महत्वाकांक्षी वित्तीय समावेशन मुहिम ने करोड़ों नागरिकों के आर्थिक जीवन में बदलाव किया है। पीएमजेडीवाई के तहत खाते खुले, डिजिटल लेनदेन में वृद्धि, और यूपीआई का विस्तार। लैंगिक समानता और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है।
भारत की महत्वाकांक्षी वित्तीय समावेशन पहल ने करोड़ों नागरिकों के आर्थिक जीवन में अभूतपूर्व बदलाव लाए हैं, खासकर महिलाओं और ग्रामीण आबादी के लिए। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम.
नागराजू ने 'ग्लोबल इंक्लूसिव फाइनेंस समिट' में बोलते हुए 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) की शुरुआत को भारत के इतिहास में 'सबसे परिवर्तनकारी दिनों में से एक' बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना ने भारत के वित्तीय परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। नागराजू ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पीएमजेडीवाई के माध्यम से अब तक 53 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इन खातों में से 72 प्रतिशत ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं, जो यह दर्शाता है कि यह योजना देश के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में सफल रही है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव लैंगिक समानता के क्षेत्र में देखा गया है, जहां 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं। इसने खाता स्वामित्व में महिला-पुरुष के बीच के अंतर को कम करने में मदद की है। नागराजू ने कहा कि इससे ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक विकास में समान भागीदार होने का महसूस कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को सशक्त बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।\डिजिटल लेनदेन और जमा राशि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, पीएमजेडीवाई खातों में जमा राशि 2.29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल बनाती है। बैंकिंग सेवाओं को दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाने के लिए 6 लाख बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। भारत डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में भी दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, जो वैश्विक रीयल-टाइम भुगतान का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2024 में इसने 21 बिलियन से अधिक लेनदेन संसाधित किए, जो कार्ड लेनदेन से 101 प्रतिशत अधिक है। डिजिटल बुनियादी ढांचे का लाभ उठाते हुए, सरकार ने मुद्रा योजना के तहत अप्रैल 2015 से अब तक लगभग 38 लाख करोड़ रुपये के 56.32 करोड़ ऋण स्वीकृत किए हैं। इनमें से 67 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना छोटे व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करके उन्हें बढ़ावा देने में मदद कर रही है। हालांकि, सफलता के बावजूद, नागराजू ने कुछ क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें शुरुआती चरणों में खोले गए खातों के लिए केवाईसी (नो योर कस्टमर) विवरण को अपडेट करना, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों को मजबूत करना और साइबर सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाना शामिल है। इन सुधारों से योजना की प्रभावशीलता और सुरक्षा में वृद्धि होगी।\सचिव ने भविष्य के लिए तीन स्तंभों वाले दृष्टिकोण का खुलासा किया। पहला स्तंभ वित्तीय समावेशन के माध्यम से वित्तीय साक्षरता सुनिश्चित करना है, जो लोगों को वित्तीय मामलों की बेहतर समझ प्रदान करेगा। दूसरा स्तंभ ऋण तक पहुंच को बढ़ाना है, जिससे लोगों को अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। तीसरा स्तंभ जोखिम कवरेज और पेंशन के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा का माहौल बनाना है, जो लोगों को अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने में मदद करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन तत्वों को शामिल करके, देश अगली शताब्दी की ओर बढ़ते समय अधिक मजबूत और सुरक्षित होगा। यूपीआई के विस्तार पर बोलते हुए, एम. नागराजू ने कहा कि भारत अब पूर्वी एशिया सहित अन्य देशों में यूपीआई की उपस्थिति बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 'ग्लोबल इंक्लूसिव फाइनेंस इंडिया समिट' में बोलते हुए, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम न केवल भारतीय पर्यटकों के लिए विदेशों में लेनदेन को आसान बनाएगा, बल्कि वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा। वर्तमान में, भारत का यूपीआई नेटवर्क आठ महत्वपूर्ण देशों- भूटान, सिंगापुर, कतर, मॉरीशस, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), श्रीलंका और फ्रांस में स्वीकार किया जा रहा है। इन देशों में भारतीय पर्यटक अपने घरेलू यूपीआई ऐप के माध्यम से सीधे भुगतान कर सकते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा विनिमय की जटिलताएं कम हुई हैं। सचिव नागराजू के अनुसार, भारत अब इस सफलता को पूर्वी एशियाई बाजारों तक ले जाने की तैयारी में है, जो पर्यटन और व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यह पहल डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देगी और भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी
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