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पटना IGIMS में साढ़े तीन वर्षों से चल रहा आयुष्मान घोटाला

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पटना IGIMS में साढ़े तीन वर्षों से चल रहा आयुष्मान घोटाला
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पटना के IGIMS में साढ़े तीन वर्षों से चल रहे आयुष्मान भारत योजना घोटाले की उच्चस्तरीय जांच शुरू हो गई है। अब उन सभी मरीजों का ऑडिट किया जाएगा जिनकी श्रेणी आयुष्मान से कैश या नकद से आयुष्मान में बदली गई है। मुजफ्फरपुर के गायघाट निवासी मनोज झा की शिकायत के बाद जांच में पाया गया कि उनसे आयुष्मान कार्ड मांगे गए और 40 हजार रुपये देने को कहा गया था। लिखित शिकायत के बाद आईएमएस प्रबंधन ने शिकायत दर्ज कराई और आउटसोर्सिंग एजेंसी मेहता डाटा मैट्रिक्स ने 45 लाख रुपया वापस करा दिए। स्वास्थ्य विभाग ने संस्थान से 48 घंटे में जवाब मांगा है और छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है।

पटना IGIMS में साढ़े 3 वर्षों से चल रहा आयुष्मान घोटाला , खुलासे के बाद अब हर मरीज का होगा ऑडिट पटना IGIMS में साढ़े तीन साल से चल रहे आयुष्मान भारत योजना घोटाले की उच्चस्तरीय जांच शुरू हो गई है। अब उन सभी मरीजों का ऑडिट किया जाएगा जिनकी श्रेणी आजागरण संवाददाता, पटना। IGIMSमें गरीबों को पांच लाख तक के कैशलेस उपचार की सुविधा देनी वाली प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना में हुए महाघोटाले की जांच बुधवार को शुरू हो गई। उच्चस्तरीय अधिकारियों ने घंटों बंद कमरे में बैठक कर निर्णय लिया कि 2023 में जब से संस्थान के सी-डैक सिस्टम से कार्य शुरू हुआ है, तब से इसकी जांच की जाएगी। फिलहाल जांच दायरा उन रोगियों तक सीमित रखा गया है, जिनकी श्रेणी आयुष्मान से कैश या नकद से आयुष्मान में बदली गई है। ऐसे सभी मरीजों का आडिट कराने का निर्णय लिया गया है। आयुष्मान योजना से जुड़े स्थायी कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी। सूत्रों के अनुसार करोड़ों रुपये की हेराफेरी की आशंका को देखते हुए हर ट्रांजैक्शन की परतें खोली जाएंगी।मुजफ्फरपुर के गायघाट निवासी मनोज झा ने आइजीआइएमएस में शिकायत की उनसे उनका आयुष्मान कार्ड मांगा गया था और बदले में 40 हजार रुपये देने को कहा गया था। उन्होंने आश्वासन पर कार्ड दे दिया पर पैसे नहीं मिले। लिखित शिकायत के बाद जांच में पाया गया कि मनोज झा का इलाज किया ही नहीं गया लेकिन कार्ड से पैसे की निकासी कर ली गई। इसके बाद आइजीआइएमएस प्रबंधन ने शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी कराई। इसके बाद आननफानन में आउटसोर्सिंग एजेंसी मेहता डाटा मैट्रिक्स ने 45 लाख रुपये आइजीआइएमएस में जमा कराए। इसे गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संस्थान से 48 घंटे में जवाब मांगा है। विभागीय निर्देश पर आइजीआइएमएस प्रशासन ने छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित की, जिसने बुधवार से जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने मेन ओपीडी भवन स्थित आयुष्मान कार्यालय के रूम नंबर-22 का निरीक्षण किया। इस दौरान आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मचारियों के कंप्यूटर सिस्टम खंगाले गए और कई सुरक्षित डिजिटल डेटा जब्त किए गए। बहुत से डाटा डिलीट किए गए हैं, अब उन्हें भी रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए तकनीकी विभाग के साफ्टवेयर इंजीनियरों को भी बुलाया गया।प्राथमिकी में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रफुल्ल रंजन ने दर्ज कराया है कि आइजीआइएमएस के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों ने बेईमानी से आयुष्मान भारत योजना के तहत आवंटित सरकारी फंड का दुरुपयोग किया है।इसके तहत रोगी के दावों का धोखाधड़ी से सृजन किया गया, नकली या बढ़ा-चढ़ाकर मेडिकल बिल जमा किए गए, जाली दस्तावेजों-रिकार्डों का प्रयोग किया गया, सरकारी प्रतिपूर्ति का मार्ग बदल कर उसे हड़पा गया, सार्वजनिक धन की अनधिकृत निकासी करने के साथ अस्पताल या लाभार्थी के रिकार्ड में हेराफेरी की गई। यह कार्य कब से चल रहा है, इसकी अवधि अज्ञात है। हालांकि जांच टीम अभी केवल मरीजों की आयुष्मान से कैश में अदला-बदली की ही जांच पर जोर दे रही है। आयुष्मान भारत में जो अनियमितता हुई है, वह तकनीकी खामी का फायदा उठाकर की गई है। ऐसे में इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए 2023 से जिन रोगियों की आयुष्मान से कैश में या कैश से आयुष्मान में अदला-बदली की गई है, सभी का आडिट कराया जाएगा। कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा। -डॉ.

विभूति प्रसन्न सिन्हा, उप निदेशक आइजीआइएमएस

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