हापुड़ में ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगातार हादसों का कारण बन रही हैं। ये वाहन अनियंत्रित होते हैं, इनमें पर्याप्त लाइट या रिफ्लेक्टर नहीं होते, और जिले में एक भी ट्रॉला पंजीकृत नहीं है। डीएम के आदेशों के बावजूद आरटीओ और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। हाल ही में एक बस-ट्रॉला टक्कर में एक की मौत और पांच घायल हुए। प्रशासन की लापरवाही से दुर्घटनाएं...
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। ट्रैक्टर-ट्राला में एक ट्रक से ज्यादा गन्ने लादकर चलने वाले चालकों का अपने वाहनों पर नियंत्रण नहीं रह जाता है। यह ट्रैक्टर भारी लोड के चलते न तो एकाएक ब्रेक ले पाते हैं और न ही इनको टर्न करना आसान होता है। स्थिति यह है कि गन्ने लेकर चलने वाले ट्रैक्टर-ट्राला हाईवे की प्रत्येक लेन में मनमानी से चलते हैं। इन पर न ताे पर्याप्त लाइट होती हैं और न ही पीछे से आने वाले वाहनों को दिखाई देने लायक कोई चिन्ह या चमकने वाली पट्टी। ट्राला पर जो चमकीली पट्टियां लगाई जाती हैं वह खुद ओवरलोड गन्नों के नीचे दब जाती हैं। इस पर भी स्थिति यह है कि जिले में एक भी ट्राला पंजीकृत नहीं है। डीएम कई बार इन पर कार्रवाई का आदेश दे चुके हैं। आरटीओ, यातायात पुलिस और शुगर मिल तीनों के अधिकारियाें को फटकार लगा चुके हैं। उसके बावजूद पूरे सीजन में एक भी ट्राला का चालान नहीं हुआ है। शनिवार रात को एक और बस ट्राला से टकरा गई। यह भी पढ़ें- करनाल में बेलगाम ओवरलोड वाहन, बढ़ रहा हादसों का खतरा; प्रशासन पर सवाल इसमें पांच लोग घायल हो गए और एक चालक की मौत हो गई। दरअसल उस समय बस में पांच-छह लोग ही सवार थे। यात्रियों के ज्यादा होने पर हादसा बड़ा हो सकता था। उसके बावजूद प्रशासन के पास इन यमराज सदृश वाहनों पर नियंत्रण की कोई प्रभावी योजना नहीं है। विवरण संख्या जिले में गन्ना ढुलाई में लगे ट्रैक्टर-ट्रॉली लगभग 2650 2024 में ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुए हादसे 43 हादसों में मौत 12 हादसों में घायल 22 2025 में ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुए हादसे 32 हादसों में मौत 10 हादसों में घायल 22 ट्रैक्टर-ट्रॉली के चालान 14 यूपी-एनसीआर में एक ओर जहां हादसों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, वहीं जिम्मेदार इसको लेकर गंभीर भी नहीं हैं। इसमें सबसे चिंतनीय हादसों के कारणों को दूर नहीं कर पाना है। इसका मुख्य कारण है सिस्टम के ज्यादातर प्रयासों टालू होना है। ठोस कार्ययोजना बनाने की बजाए तात्कालिक उपायों का एलान कर अपने कर्तव्य की इतिश्री की जा रही है। वहीं विभागों के आपसी सामजस्य के अभाव में भी सुरक्षा उपाय क्रियान्वित नहीं हो पा रहे हैं। यही कारण है कि साल-दर -साल समस्याएं जस की तस हैं और उपाय घोषणाओं तक सीमित रह जा रहे हैं। हादसों का मुख्य समय सर्दियों का होता है। यही समय गन्ने की ट्रैक्टर-ट्रालियों के चलने का भी होता है। हादसों का बड़ा कारण भी ट्रैक्टर-ट्रालियां बनकर सामने आ रही हैं। इनकी धीमी गति, रांगसाइड, रांग लेन और अवैध कट से होता आवागमन हादसों की संख्या और बढ़ा देता है। इन पर पीछे की ओर लाइट और साइनिंग टेप भी नहीं होती है। वहीं मजबूत लोहा होने के चलते ट्रैक्टर-ट्रालियों में नुकसान कम रहता है, जबकि इनसे टकराने वाले वाहन में जान-माल का बड़ा नुकसान होता है। ऐसे में हर साल दर्जनों हादसे इनके कारण होते हैं। तेज रफ्तार बनता है हादसों का अहम कारण यूपी-एनसीआर के जिलों से होकर कई बड़े हाईवे निकल रहे हैं। यह कई प्रदेशों को आपस में ऐसे जोड़ते हैं। ऐसे में इन हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों की भरमार रहती है। एक ओर जहां कार व बस-ट्रक तीव्र गति से चलते हैं, वहीं हाईवे का प्रयोग धमकी गति से चलने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियां भी करते हैं। यह हाईवे पर होने वाले हादसों का प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से बड़ा कारण है। एक ओर जहां ओवर लोड और धीमी गति हादसों का मुख्य कारण होते हैं, वहीं यह वाहन और इनके चालक दोनों ही कम दृश्यता का शिकार होते हैं। ट्रैक्टर-ट्राली के चालक को अपने दाएं-बाएं या पीछे देखने के लिए कोई सुविधा नहीं होती है। ऐसे में चालक मनमाने तरीके से जिस लेन में वाहन चलाना, मोड़ना-साइड करना चाहता है। करने लगता है। उसको अपने दाएं-बाएं या पीछे से आने वाले वाहनों की जानकारी ही नहीं होती है। वहीं ट्रैक्टर की तेज आवाज पीछे की ओर से आने वाले वाहनों का हार्न भी सुनाई नहीं देने देती है। ओवरलोड ट्रालियों-ट्रालों के कारण चालक को पीछे की ओर के वाहनों की लाइट का भी एकाएक संज्ञान नहीं हो पाता है। दूसरी बड़ी समस्या ट्रैक्टर-ट्रालियों का मनमाने लेन और दिशा में चलना है। इनके चालक मनमाने तरीके से तेज रफ्तार वाली मध्य लेने या ओवरटेक करने वाली दाईं लेन से होकर चलने लगते हैं। कई बार ट्रैक्टर-ट्राली रांग साइड में चलते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार से चल रहे कार-बाइक को नियंत्रित कर पाना आसान नहीं हाेता है। एआरटीओ प्रवर्तन रमेश चौबे ने बताया कि विभाग का ट्रैक्टर-ट्रालियों पर एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जाएगा। यह भी पढ़ें- 164 वाहनों के नेशनल परमिट के रिन्यूअल के लिए चार दिन का समय, फिटनेस सर्टिफिकेट समाप्ति पर होगी कार्रवाई मानक से इतर कोई भी वाहन नहीं चलने दिया जाएगा। इसके स्पष्ट आदेश दे दिए गए हैं। चीनी मिलों के ठेकेदार के वाहन से हादसा होने पर ठेकेदार को भी आरोपित बनाया जाएगा। वहीं यातायात पुलिस और आरटीओ के साथ ही एसडीएम को भी मानकों से इतर चलने वाले मालवाहक वाहनों के चालान करने को कहा गया है। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। - संदीप कुमार - एडीएम।.
ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। ट्रैक्टर-ट्राला में एक ट्रक से ज्यादा गन्ने लादकर चलने वाले चालकों का अपने वाहनों पर नियंत्रण नहीं रह जाता है। यह ट्रैक्टर भारी लोड के चलते न तो एकाएक ब्रेक ले पाते हैं और न ही इनको टर्न करना आसान होता है। स्थिति यह है कि गन्ने लेकर चलने वाले ट्रैक्टर-ट्राला हाईवे की प्रत्येक लेन में मनमानी से चलते हैं। इन पर न ताे पर्याप्त लाइट होती हैं और न ही पीछे से आने वाले वाहनों को दिखाई देने लायक कोई चिन्ह या चमकने वाली पट्टी। ट्राला पर जो चमकीली पट्टियां लगाई जाती हैं वह खुद ओवरलोड गन्नों के नीचे दब जाती हैं। इस पर भी स्थिति यह है कि जिले में एक भी ट्राला पंजीकृत नहीं है। डीएम कई बार इन पर कार्रवाई का आदेश दे चुके हैं। आरटीओ, यातायात पुलिस और शुगर मिल तीनों के अधिकारियाें को फटकार लगा चुके हैं। उसके बावजूद पूरे सीजन में एक भी ट्राला का चालान नहीं हुआ है। शनिवार रात को एक और बस ट्राला से टकरा गई। यह भी पढ़ें- करनाल में बेलगाम ओवरलोड वाहन, बढ़ रहा हादसों का खतरा; प्रशासन पर सवाल इसमें पांच लोग घायल हो गए और एक चालक की मौत हो गई। दरअसल उस समय बस में पांच-छह लोग ही सवार थे। यात्रियों के ज्यादा होने पर हादसा बड़ा हो सकता था। उसके बावजूद प्रशासन के पास इन यमराज सदृश वाहनों पर नियंत्रण की कोई प्रभावी योजना नहीं है। विवरण संख्या जिले में गन्ना ढुलाई में लगे ट्रैक्टर-ट्रॉली लगभग 2650 2024 में ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुए हादसे 43 हादसों में मौत 12 हादसों में घायल 22 2025 में ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुए हादसे 32 हादसों में मौत 10 हादसों में घायल 22 ट्रैक्टर-ट्रॉली के चालान 14 यूपी-एनसीआर में एक ओर जहां हादसों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, वहीं जिम्मेदार इसको लेकर गंभीर भी नहीं हैं। इसमें सबसे चिंतनीय हादसों के कारणों को दूर नहीं कर पाना है। इसका मुख्य कारण है सिस्टम के ज्यादातर प्रयासों टालू होना है। ठोस कार्ययोजना बनाने की बजाए तात्कालिक उपायों का एलान कर अपने कर्तव्य की इतिश्री की जा रही है। वहीं विभागों के आपसी सामजस्य के अभाव में भी सुरक्षा उपाय क्रियान्वित नहीं हो पा रहे हैं। यही कारण है कि साल-दर -साल समस्याएं जस की तस हैं और उपाय घोषणाओं तक सीमित रह जा रहे हैं। हादसों का मुख्य समय सर्दियों का होता है। यही समय गन्ने की ट्रैक्टर-ट्रालियों के चलने का भी होता है। हादसों का बड़ा कारण भी ट्रैक्टर-ट्रालियां बनकर सामने आ रही हैं। इनकी धीमी गति, रांगसाइड, रांग लेन और अवैध कट से होता आवागमन हादसों की संख्या और बढ़ा देता है। इन पर पीछे की ओर लाइट और साइनिंग टेप भी नहीं होती है। वहीं मजबूत लोहा होने के चलते ट्रैक्टर-ट्रालियों में नुकसान कम रहता है, जबकि इनसे टकराने वाले वाहन में जान-माल का बड़ा नुकसान होता है। ऐसे में हर साल दर्जनों हादसे इनके कारण होते हैं। तेज रफ्तार बनता है हादसों का अहम कारण यूपी-एनसीआर के जिलों से होकर कई बड़े हाईवे निकल रहे हैं। यह कई प्रदेशों को आपस में ऐसे जोड़ते हैं। ऐसे में इन हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों की भरमार रहती है। एक ओर जहां कार व बस-ट्रक तीव्र गति से चलते हैं, वहीं हाईवे का प्रयोग धमकी गति से चलने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियां भी करते हैं। यह हाईवे पर होने वाले हादसों का प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से बड़ा कारण है। एक ओर जहां ओवर लोड और धीमी गति हादसों का मुख्य कारण होते हैं, वहीं यह वाहन और इनके चालक दोनों ही कम दृश्यता का शिकार होते हैं। ट्रैक्टर-ट्राली के चालक को अपने दाएं-बाएं या पीछे देखने के लिए कोई सुविधा नहीं होती है। ऐसे में चालक मनमाने तरीके से जिस लेन में वाहन चलाना, मोड़ना-साइड करना चाहता है। करने लगता है। उसको अपने दाएं-बाएं या पीछे से आने वाले वाहनों की जानकारी ही नहीं होती है। वहीं ट्रैक्टर की तेज आवाज पीछे की ओर से आने वाले वाहनों का हार्न भी सुनाई नहीं देने देती है। ओवरलोड ट्रालियों-ट्रालों के कारण चालक को पीछे की ओर के वाहनों की लाइट का भी एकाएक संज्ञान नहीं हो पाता है। दूसरी बड़ी समस्या ट्रैक्टर-ट्रालियों का मनमाने लेन और दिशा में चलना है। इनके चालक मनमाने तरीके से तेज रफ्तार वाली मध्य लेने या ओवरटेक करने वाली दाईं लेन से होकर चलने लगते हैं। कई बार ट्रैक्टर-ट्राली रांग साइड में चलते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार से चल रहे कार-बाइक को नियंत्रित कर पाना आसान नहीं हाेता है। एआरटीओ प्रवर्तन रमेश चौबे ने बताया कि विभाग का ट्रैक्टर-ट्रालियों पर एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जाएगा। यह भी पढ़ें- 164 वाहनों के नेशनल परमिट के रिन्यूअल के लिए चार दिन का समय, फिटनेस सर्टिफिकेट समाप्ति पर होगी कार्रवाई मानक से इतर कोई भी वाहन नहीं चलने दिया जाएगा। इसके स्पष्ट आदेश दे दिए गए हैं। चीनी मिलों के ठेकेदार के वाहन से हादसा होने पर ठेकेदार को भी आरोपित बनाया जाएगा। वहीं यातायात पुलिस और आरटीओ के साथ ही एसडीएम को भी मानकों से इतर चलने वाले मालवाहक वाहनों के चालान करने को कहा गया है। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। - संदीप कुमार - एडीएम।
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