इस वर्ष दशहरा 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, रावण दहन का शुभ मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 03 मिनट से लेकर 02 बजकर 49 मिनट तक है। दशहरा धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस खास अवसर पर देशभर में कुंभकरण, रावण और मेघनाथ के पुतले दहन किए जाते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार, दशमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी। इसलिए इस पर्व को धर्म की अधर्म की जीत के रूप में उत्साह के साथ मनाया जाता है। चलिए जानते हैं इस पर्व की जुड़ी महत्व पूर्ण बातें। दशहरा 2024 डेट और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, इस बार आश्विन माह शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का प्रारंभ 12 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से होगा। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 13 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 08 मिनट पर होगा। ऐसे में दशहरा का पर्व 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा। अपराह्न पूजा का समय दोपहर 01 बजकर 17 मिनट से लेकर 03 बजकर 35 मिनट तक है। रावण दहन का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है- रावण दहन विजय मुहूर्त में किया जाता है। इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 03 मिनट से लेकर 02 बजकर 49 मिनट तक है। इस दौरान आप रावण दहन कर सकते हैं। यह भी पढ़ें: Diwali 2024: नवंबर महीने में कब है दिवाली? नोट करें शुभ मुहूर्त , योग एवं पूजन समय विजयादशमी का महत्व सनातन धर्म में दशहरा का दिन बेहद उत्तम माना जाता है। इस दिन प्रभु ने राम ने रावण का दहन कर अधर्म पर धर्म की स्थापना की थी। इसके अलावा मां दुर्गा ने महिषासुर नामक दैत्य का वध किया था। विजयादशमी के दिन लोग कुंभकरण, रावण और मेघनाथ के पुतले बनाकर उनका दहन करते हैं। इन मंत्रों का करें जप राम ध्यान मंत्र ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम , लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम ! श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे , रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः ! श्री राम गायत्री मंत्र ॐ दाशरथये विद्महे जानकी वल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥ राम मूल मंत्र ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः॥ यह भी पढ़ें: Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्र की डेट को लेकर न हों कन्फ्यूज, यहां जानें सही तारीख और घटस्थापना का समय अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।.
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस खास अवसर पर देशभर में कुंभकरण, रावण और मेघनाथ के पुतले दहन किए जाते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार, दशमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी। इसलिए इस पर्व को धर्म की अधर्म की जीत के रूप में उत्साह के साथ मनाया जाता है। चलिए जानते हैं इस पर्व की जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। दशहरा 2024 डेट और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, इस बार आश्विन माह शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का प्रारंभ 12 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से होगा। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 13 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 08 मिनट पर होगा। ऐसे में दशहरा का पर्व 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा। अपराह्न पूजा का समय दोपहर 01 बजकर 17 मिनट से लेकर 03 बजकर 35 मिनट तक है। रावण दहन का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है- रावण दहन विजय मुहूर्त में किया जाता है। इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 03 मिनट से लेकर 02 बजकर 49 मिनट तक है। इस दौरान आप रावण दहन कर सकते हैं। यह भी पढ़ें: Diwali 2024: नवंबर महीने में कब है दिवाली? नोट करें शुभ मुहूर्त, योग एवं पूजन समय विजयादशमी का महत्व सनातन धर्म में दशहरा का दिन बेहद उत्तम माना जाता है। इस दिन प्रभु ने राम ने रावण का दहन कर अधर्म पर धर्म की स्थापना की थी। इसके अलावा मां दुर्गा ने महिषासुर नामक दैत्य का वध किया था। विजयादशमी के दिन लोग कुंभकरण, रावण और मेघनाथ के पुतले बनाकर उनका दहन करते हैं। इन मंत्रों का करें जप राम ध्यान मंत्र ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम , लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम ! श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे , रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः ! श्री राम गायत्री मंत्र ॐ दाशरथये विद्महे जानकी वल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥ राम मूल मंत्र ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः॥ यह भी पढ़ें: Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्र की डेट को लेकर न हों कन्फ्यूज, यहां जानें सही तारीख और घटस्थापना का समय अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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